Sunday, December 6, 2009

‘‘पीत पत्रकारिता एक दिलचस्प शुरूआत‘‘

‘‘पीत पत्रकारिता एक दिलचस्प शुरूआत‘‘

पुलित्जर अवार्ड के बारे में आप सभी ने सुना होगा।पत्रकारिता जगत के इस प्रतिष्ठित अवार्ड की शुूरूआत कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा 1912 में की गई।इस अवार्ड के साथ जिस खास शख्सियत जोसेफ पुलित्जर का नाम जुड़ा है उन्होने पत्रकारिता जगत को एक नई दिशा प्रदान की।जिसे आज हम सभी पीत पत्रकारिता के नाम से जानते हैं।लेकिन पीत पत्रकारिता की शुरूआत एक दिलचस्प कारण से हुई।आइए जानते हैं क्या था वह दिलचस्प कारण।


न्यूयाॅर्क में ‘द वल्र्ड‘ नामक एक स्थानीय समाचार निकलता था।जिसके जोसेफ पुलित्जर थे। पुलित्जर के अखबार ‘‘द वल्र्ड‘‘ और उसके प्रतिद्वंदी हस्र्ट के अखबार ‘‘न्यूयाॅर्क हैराॅल्ड‘‘ के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती थी। दोनों ही समाचार पत्रों ने अपनी-अपनी प्रचार संख्या बढ़ाने के लिए हर तरह के सही-गलत प्रयोग किए। सनसनीखेज ही नहीं बल्कि झूठी खबरें तक छापी गई।आज की तरह ही दोनों अखबारों के बीच लंबी प्राइज वार छिड़ी। अखबारों के एजेंटों और वितरकों के बीच जमकर तोड़फोड़ हुई।

मगर इस पूरी प्रतिस्पर्धा में एक तथ्य बड़ा दिलचस्प था वह यह कि दोनों ही समाचार पत्रों का एक काॅमन कार्टूनिस्ट था।जिसका नाम था तरूण। प्रतिस्पर्धा में यह कार्टूनिस्ट दोनों ही अखबारों के दबाव में इस कदर मजबूर हुआ कि दोनों ही स्थानों पर एक-एक हफ्ते बारी-बारी से काम करने लगा। आमतौर पर यह कार्टूनिस्ट पीले रंग का कोर्ट पहना करता था।जब वह ‘द वल्डर्‘ में काम करता तो अपने कार्टूनों के जरिए ‘न्यूयाॅर्क हैराॅल्ड‘ की जमकर आलोचना करता और जब ‘न्यूयाॅर्क हैराॅल्ड‘ में काम करता तो ‘द वल्र्ड‘ की बखिया उधेड़ने से बाज नहीं आता। जोसेफ पुलित्जर की सनसनीखेज पत्रकारिता और पीले रंग के कोर्ट पहनने वाले इसी तरूण ने पत्रकारिता जगत में येलो जर्नलिज्म यानी पीत पत्रकारिता को जन्म दिया।

प्रस्तुति किरन कौर
सो्रतः-इंटरनेट पत्रकारिता