Friday, November 19, 2010

अब मुझे प्यार से प्यार नही

स्वाभिमान से बढकर मेरे लिए कुछ नही अज एक मुश्किल दिन था एक तरफ मेरा स्वाभिमान था तो दूसरी तरफ मेरा प्यार। पर अज अपने फेसले से खुश हूँ की प्यार और स्वाभिमान के बिच प्यार को चुना। प्यार को चुनती तो स्वाभिमान खो देती और उसी में समाप्त हो जाता मेरा अस्तित्व लेकिन अज खुश हूँ स्वाभिमान को चुना।
सच है प्यार से इतना प्यार मत करो की तुमे एक दिन प्यार से प्यार ही न रहे

Friday, July 9, 2010

सिर्फ एक हसीं के liye


मुझे बीते तिन महीनो में वो दिन याद नहीं आता जब में दिल खोल के हसीं हूँ

क्या आपको याकड है अगर हाँ तुझे मुझे बताएं ताकि उस बहाने में हस सहूँ।

क्यूंकि लखनऊ में लोग हसना भूल गये है

Monday, June 28, 2010

यहाँ हर साख पे उल्लू बेठा है

मुझे काटने को दोड़ता है यह ये लखनऊ शहर

जवाब नही जानती लेकिन ये सच है

यहाँ हर साख पे उल्लू बेठा है

Friday, May 21, 2010

आपका घर मकान बन जाये.

कई दिनों के बाद अब सुकून मिल पाया
में अब समझ पातीहूँ की घर घर और मकान मकान क्यों है
सो दोस्तों आप में से जो भी खुशकिस्मत लोग अपने gharon में rehte hon
vo uski kimat ko samjhe और usme har pal को जियें एसा न हो की
जल्द ही आपका घर मकान बन जाये.

Saturday, May 15, 2010

hanuman जी की तीन varity है


lucknow गजब शहर है यहाँ हर कुछ खास है अब हनुमान जी को ही लो

यहाँ लोगों के लिए हनुमान तीन तरह के है

एक आम लोगों के हनुमान

दुसरे आई एस हनुमान

तीसरे वकील हनुमान

आई एस हनुमान जी के मंदिर की यह खासियत है की यहाँ जयादातर
भक्त आई एस आते।

वकील हनुमान जी के मंदिर में वकील भक्त ज्यादा आते है

तो कुल मिला कर यहाँ हनुमान
जी की तीन varity है अब आप जिस केटेगरी

में हो आप अपने आराध्य को उस रूप में पूजे.

Saturday, May 8, 2010

shant rehne me hi budhimani hai

pichle do din se me bahut gusse me thio vajah thi meri makan malkin
jo har roj mujhe college jate waqt tokti thi or betuki baton ke liye lecture deti thi bujurg hai or is umar me unka sathiyana lajmi hai magar ek dam ghar se niklte waqt mujhe tokna mujhe pasand nhi ata tha aj phir wahi hua lekin aj me subh subh hi unki shikar ho gi or shuru ho gya unka guru gyan or kiraye ke liye chik chik.lekin ab vo khuch jada nhi boli kyunki me aj tak unki kisi bat jawab hi nhi deti ek maha deet ki tarah sirf unhe dekhti hun shayad mere is behave unhe khud hi shant ho jane ke liye vivash kar diya hai.
is puri ghatna se mujhe ek bat sikhne ko mili jab halat apke anukul na ho to shant rehne me hi budhimani hai.

Friday, May 7, 2010

केसे गुजरी होगी उसकी वो रात


हमारा देश भी बड़ा अजीब है कभी यहाँ किसान पानी की एक बूँद के लिए तरसता है तो कभी झमा झम पानी उसकी फसल को बर्बाद कर डालता है.कल रात लखनऊ में पहली बारिस देखी सुबह बाराबंकी की ओर जाते हुए

बारिस से नहाये लहलाहते खेत देखे उन्हें देख देख कर मै बहुत खुश हो रही थी और खुद को किसी जन्नत में होने का एहसास करा रही थी चारो तरफ दूर दूर तक फेले सपाट खेत जिन पर कहीं मिर्च के पोधे थे तो कहीं आम से लादे विशाल पेड़ मेरे लिए यह अनूठा था क्यूंकि में देल्ही की हूँ और वहां की बड़ी बड़ी इमारतों के बीच एसा सुखद एहसास कहाँ ये नज़ारे मन मो रहे थे लेकिन जसे ही मेरी गाढ़ी थोड़ी आगे बड़ी मेरा दिल दख रह गया गैस फूस से बनी झोपड़ी मै किसान ओर उसका परिवार रो रहा था क्यूंकि रत की बारिस मै उसकी सारी गेंहू भीग गयी थी जो शायद उसकी साल भर की रोजी रोटी थी.इसे कई परिवार थे । तब से मेरे दिल मै एक ही सवाल रह रह कर अ रहा है की केसे गुजारी होगी उस किसान ने वो रात

Saturday, April 10, 2010

नक्सलवाद और गेट नंबर ३


अमोसी एअरपोर्ट के गेट नंबर ३ पर यूँ तो हर रोज सेकड़ों निगाहें अपनों के इंतजार में लगी रहती होंगी । मगर आज यानी ७ अप्रैल २०१० के दिन इस गेट नंबर ३ का नजारा कुछ और था । रोज की तरह यहाँ आज भी सेकड़ों निगाहें थीं, लेकिन ये किन्ही परिजनों की नहीं बल्कि सी आर पी एफ ,सी आई आर एफ और यू पी पुलिस के छोटे से लेकर बड़े अफसर तक की थी जो पहुंचा था यहाँ शहीदों को श्रदांजलि देने के लिए।

वह जवान जो शहीद हुए थे छतीसगढ़ में दंतेवाडा के नक्सली हमले में। चारों तरफ गहमागहमी थी और पुलिसिया प्रशासन जुटा था शहीदों को सम्मान देने की तयारी में। कहीं आला अधिकारी आदेश पर आदेश दे रहे थे, तो कहीं सी आर पी एफ जवान गार्ड ऑफ़ ओनर देने के लिए पंक्तियों में खड़े हो रहे

थे

बेहरहाल वक्त हुआ ३ बजकर १७ मिनट और गेट नंबर ३ अपनी भूमिका निभाने के लिए तेयार हो गया। सम्मान देने पहुंचे जवानों का एक जतथा गेट नंबर ३ से जेसे ही भीतर गया गेट नंबर ३ के बाहर सन्नाट छा गया ये जवान गए तो अकेले लेकिन लोटे एक शव के साथ । यह शव था एक जवान का और यह जवान था कांस्टेबल रामानंद यादव। शहीद रामानंद यादव का शव जेसे ही गेट नंबर ३ से बाहर निकला सबके दिल ठिठक कर रह गए । फिर शुरू हुआ एक के बाद एक शवों का आना और एक एक कर जेसे १२ शव गेट नंबर ३ से बाहर आते आम से लेकर खास तक की आँखों से आंसू छलक आये ।

गार्ड ऑफ़ ओनर में मोजूद एक रोटी हुई महिला से जब पूछा गया की क्या इन शहीदों में आपका भी कोई था तो उसका जवाब था की ये सब अपने ही तो थे और फफक फफक कर रो पड़ी। लेकिन १२ शहीदों को एक साथ श्रदांजलि देने वाला यह गेट नंबर ३ इतिहास बन गया।

Wednesday, April 7, 2010

लखनऊ में बहुत कुछ खास है


लखनऊ में बहुत कुछ खास है


यहाँ दिल्ली की तरह खीरे,मूली और गोभी


किलो में नहीं बल्कि २ रुपये ५ रुपये की मिलती।


यहाँ ज्यादातर शाही खाना चाँदी के वर्क और ताम्बे के बर्तन में परोसा जाता है इसके पीछे वजह ये है की पुराने समय में जो अवाद के नवाब थे वो अपने दुश्मन के षडयन्त्रो से बचने के लिए खान इस तरह से परोसने का आदेश देते थे क्यूंकि अगर खाने में जहर होता था तो वेरक तुरंत नीला हो जाता था इसी तरह ताम्बे का बर्तन किनारों से काला रंग छोड़ देता था


यहाँ की खास स्वीट डिश अनारदाने का पुलाव है

Tuesday, April 6, 2010

तहजीब के इस शहर से तहजीब ही गायब है


कहते है नवाबों के शहर लखनऊ

में एक चीज जो खास है वो है यहाँ कि तहजीब

जिसके लिए इसे देश और दुनिया में जाना जाता है

इस शहर में आये मुझे ४ दिन हो गए और इन 4 दिनों का मेरा

अनुभव मुझे यह कहने पर मजबूर करता है कि

तहजीब के इस शहर से तहजीब ही गायब है

औरत के लिए इस शहर में कोई सम्मान नहीं

बस है तो सिर्फ गन्दी घूरती निगाह्यें
बस चले तो यह औरत को नोच खाएं

ऐसा नही कि यह सब दिल्ली जेसे बड़े शहरो में नही होता

मगर वहां कुछ खास लोग है जो ऐसी सोच के है

वर्ना वहां औरत के ब्रेन विद ब्यूटी को सम्मान है

लेकिन यहाँ सड़क चाप लोगों से लेकर बड़े बड़े दफ्तरों तक बस यही हाल है

सर से लेकर पांव तक घूरती nighayein या फिर सड़क चाप फब्तियां

aurat के सम्मान के लिहाज से गतिया शहर है लखनऊ

आज मैं भूखी हूँ


मुझे करीब से जानने वाले लोग जानते है

कि मैं खाने की बहुत बड़ी शोकिन हूँ

मेरा मानना है कि इस दुनिया में do तरह के लोग रहते है

एक वो जो जीने के लिए खाते है

और एक वो जो खाने के लिए jite है

बेहरहाल अपनी गिनती दूसरे तरह के लोगों में होती है

मगर आज का दिन मुझे जीवन भर याद रहेगा

शाम के ६ बजने को आयें है आज मैं भूखी हूँ

ऐसा नही है कि मेरे पास पइसे नही मगर

ऑफिस से लेकर दूर दूर तक khin कैंटीन नहीं

लेकिन दिल्ली से अच्हा जलजीरा यहाँ जरुर मिलता है

आस है कि अच्हा खाना मिल जाये वर्ना bhagwaan जाने मेरा क्या होगा

अंत में तो यही सोच कर संतोष कर लूँ हारे को हरी नाम .

Monday, March 22, 2010

पुरुस्कार के बदले पिटाई



मशरूम की खेती करने के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार पाने वाली एक महिला जब ओड़िसा से दिल्ली आई तो वापस लोटने पर उसके पति ने उस पर दुश चरित्र होने का आरोप लगा कर मार पीट कर उसे घर से बाहर निकल दिया ।
ये है हमारे समाज की विडम्बना जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर मिलता है सम्मान वहां घर में होता है सिर्फ अपमान।
तभी आज भी लोग ये कहने पर मजबूर है .........

'हाय अबला जीवन तेरी यही कहानी, आंचल में है दूध तेरे और आँखों में है पानी।

Saturday, March 20, 2010

ज़िन्दगी लुटा दूँ


ज़िन्दगी लुटा दूँ इक बार मुस्कुरा दे

कुछ नही मेरा सब कुछ तेरी इक हंसी के आगे

आँखों की ये नमी तेरे बिन ये सभी

आजा दे दे मुझे मेरी जान।

Friday, March 19, 2010

जब नींद आ रही हो



कितना गुस्सा आता है जब नींद आ रही हो

और हालात आपको सोने न दे। जहाँ तहांकी

टेंशन दिमाग में हो और आँखों में नींद.

राजस्थान में आज भी सीट विधायकों के लिए आरक्षित होती है।



हाल ही में राजस्थान जाने का मोका मिला काफी चीजें देखी।

लेकिन एक चीज ने मुझे बड़ा आकर्षित किया ,कि राजस्थान

की बसों में आज भी पहली और दूसरी सीट विधायकों के लिए

आरक्षित होती है। भले ही विधायक कभी उस बस में बेठे नही

लेकिन फिर भी सीटें आरक्षित है । दरअसल हमारे देश की

यही विडंबना है की जिसे आरक्षण की जरूरत होती है उसे

उसका लाभ नही मिलता और असली मलाई कोई और चाट जाता है.

Thursday, March 18, 2010

ख़ुशी में दोहरा इजाफा हुआ


जहाँ एक तरफ महिला आरक्षण बिल के राज्य सभा में इसके पास होने की ख़ुशी है वही सायना नेहवाल के दुनिया के ५ शीर्ष खिलाडियों में शामिल होने से इस ख़ुशी में दोहरा इजाफा हुआ है। ख़ुशी यह नही की सायना ने एसा किया है । ख़ुशी इस बात की है २० साल से कम उम्र की यह लड़की उस वक़्त सुर्ख़ियों में आई है जब भारत में सिर्फ क्रिकेट की ही धूम है और खेलों में जाने के लिए लड़कियों न केवल समाज बल्कि माता पिता तक का भी प्रोत्साहन नही मिल पा रहा है सायना की इस उड़ान से ये उमीद तो जगी है की शायद अब समाज का रव्वैया बदले।

महंगाई बढ रही है


लगातार महंगाई बढ रही है आज ही पेपर में दूध के दाम बढने की खबर पड़ी सरकार लाचार दिख रही है और हर कोई किसी न किसी पर आरोप मढने में लगा हुआ है पर पक्ष हो या विपक्ष किसी का भी ध्यान आम इन्सान पर क्यूँ नही क्या आप सत्ता में सिर्फ अपनी कुर्सी चमकाने या किसी सी डी प्रकरण में फसने, करोड़ों की माला पहनने या ट्वीटर पर सिर्फ टिपण्णी करने के लिए आते है।

इस दुनिया मै सब से मुश्किल क्या है


ये सवाल उन सब से है जो भी इसे पड़े।

अपने जरुर सोचा होगा की मेने ये सवाल

क्यूँ किया क्यूंकि किसी की आँखों में आंसू

देख पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल है। मुझ

में वो ताकत नही की में किसी को रोता देख सकूँ।

भारत में दुनिया के एक तिहाई भूखे रहते है



ग्लोबल हंगेर इंडेक्स के अनुसार
भारत में दुनिया के एक तिहाई

भूखे रहते है जिनकी संख्या ३२

करोड़ से अधिक है।एसे में सरकार
गेंहू का निर्यात करने के बारे में सोच
रही है। यह सरासर बेवकूफी नही है
तो और क्या है। साफ है इस तरह
के निर्यात का फायदा केवल बिचोलियों को
होगा और किसी को नही । बिचोलिये
निर्यात के नाम पर धड़ल्ले से स्टोक
करेंगे और एक बार फिर खाद्य पदार्थों के
दाम बढेंगे.

Wednesday, March 17, 2010

खुद पर से ही विश्वास क्यूँ उठने लगता है।

नर हो न निराश करो मन को
आज कल ये जुमला हमारी क्लास मै बड़ा
छाया हुआ है मगर फिर भी मै इसे क्यूँ लिख रही हूँ
इसके पीछे भी एक बात है मेरे ठीक साथ वाली कुर्सी पर मेरा एक दोस्त बेहद हताश है
और उस से भी बढ कर वो खुद एक लेख में ये लिख रहा है की उसे अब अपनी काबिलियत पर ही शक होने लगा है। आखिर खुद पर से ही विश्वास क्यूँ उठने लगता है।

नोबेल पुरूस्कार


हाल ही में शांति के नोबेल पुरूस्कार के लिए २३७ व्यक्तियों और संस्थाओं
ने आवेदन किया। बड़ा सवाल ये है की अगर इतनी बड़ी तादाद में लोग
विश्व में शांति कायम करने में लगे हें है तो फिर शांति कायम होती
क्यूँ नही.

ये दिल्ली है मेरी है जान




दिल्ली के लिए मुन्नवर राणा का एक शेर



"बड़ा गहरा ताल्लुक है सियासत से तबाही का



कोई भी शहर जलता है तो दिल्ली मुस्कुराती है "

Friday, March 5, 2010

एक स्कूल का शर्मनाक रवैया


कश्मीर में आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला कर चर्चा में रही रुखसाना एक बार फिर चर्चा में है लेकिन इस बार चर्चा में वह इसलिए है क्यूंकि उसको और उसके भाई को हाल ही में स्कूल ने निकाल दिया। इसके पीछे स्कूल ने तर्क दिया है की उसके और उसके भाई के पढने से स्कूल पर आतंकी हमला होने के आसार है हम सभी जानते है की आतंकवाद का सामना व्यक्तिगत रूप से एक जुट होकर ही किया जा सकता है ऐसे में स्कूल का यह निर्णय बेहद शर्मनाक है ।

Friday, February 26, 2010

क्या आप जवाब दे पाएंगे


एक अनार और १०० बीमार! बचपन में यह कहावत कई बार टीचर ने रट्वाई। तब न मतलब समझ आया और न इसकी गम्भीरता, बस रट लिया। लेकिन जब ग्रेजुएट हुई तो कई बार इंटरव्यू में इस सच्चाई का सामना किया। मगर आज बिग एफ एम के इंटरव्यू में इस कहावत का भयावह चेहरा देखने को मिला। सुबह के १० बजे थे, रोज की तरह हम सभी कॉलेज पहुंचे लेकिन आज वो मस्ती, वो शरारत किसी के भी चेहरे पर नजर नही आई। हस्ते हुएसब एक दूसरे से बात तो कर रहे थे मगर मन में सभी के एक तनाव था, एक dar था। बात शुरू हुई ....... कि वो आये नही। फिर कुछ समय के बाद अफवाह उडी कि उन्हें चाहिए ४ और कैन्डिडेट है १०४ इस बात ने सब के तनाव को और बढ़ा दिया। इतने में पता चला कि किसी सदी में पास आउट आर जे कोर्स के स्टुडेंट भी भेठने वाले है बस क्या था हर किसी ने मन ही मन खुद को टटोला और परेशान हो इधर उधर जाने लगे। थोड़ी देर बाद ही आदेशानुसार मिनी ऑडी में बेठने को कहा गया। बस हर कोई चल दिया उस और अपनी किस्मत अजमाने। १० बजे से बेठे बेठे १ बज गया मगर वो नही आये। अब तनाव बढ़ रहा था जो हम सभी पर हावी होता जा रहा था और हर किसी के जेहन में एक ही सवाल रह रह कर कोंध रहा था कि मेरा क्या होगा। बेहरहाल वो आये और पता चला कि वो रिटन नही इंटरव्यू लेंगे आधे से जादा लोग वहीँ धराशाही हो गये १०४ कि गिनती सिमट कर ५० भी नही रही पर उसके बाद निराश लोगों के जो चेहरे पर देखने को मिली बो भयावह थी उन आँखों में निराशा साफ थी और उस से भी बढ़ कर भविष्य कि चिंता.उन आँखों में वो सपने बार बार घूम रहे थे कि घर किस मुंह से जाउंगी /जाऊंगा.बस मेरा आप सब से एक सवाल है कि हर कोई हम से उमीद करता है कि हम जन सेवा करें पर कहाँ से होगी ये जन सेवा जब कोई रास्ता ही न होगा.

Monday, February 22, 2010

एक धन्यवाद

इस बार वेश्नो देवी जाने का मोका मिला देख कर बहुत ख़ुशी हुई। वो इसलिए क्यूंकि पहली बार किसी धार्मिक जगह पर इतनी भीड़ होते हुए भी साफ सफाई की उचित व्यवस्था देखने को मिली, यात्रियों के रहने से लेकर उनके खाने पीने अदि सभी का उचित प्रबन्ध। जाने से कुछ दिन पहले ही दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में एंकर लीड में खबर पड़ी थी की सिर्फ दो ढाबों पर चल रही है माँ वेश्नो देवी की चढाई। पढ़ी हुई बात और आँखों देखी बात में जमीन असमान का फर्क था तब लगा की वाकई मीडिया अपनी स्टोरी या खबर क लिए किस तरह कुछ भी दिखा या लिख सकता है। बेहरहाल श्रअइन बोर्ड का इतनी बेहतरीन सुविधा क लिए धन्यवाद ।

बदले बदले से हैं जनाब के तेवर


बीजेपी के बारे में कहावत प्रचलित थी की ये तो ब्राह्मणों की पार्टी है.लेकिन कुछ दिनों पहले बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने जिस तरह से मुस्लिमो और अल्पसंख्यंको की बात कही उससे लगा की अब बयार कुछ बदलाव की ओर है.भले ही उसके जरिये उन्होंने अपने राम मंदिर निर्माण के अलाप को भी गा दिया पर एक बार फिर से मुस्लिमो की बात तो कही.२००४ में जब बिहार में एक रैली में अटल बिहारी वाजपयी ने मुस्लिमो की बात कही थी तो अंदरूनी रूप से पार्टी उन से नाराज हुई मगर आजकल पार्टी अध्यक्ष का जो बर्ताव दिखाई देता है उसमे कुछ बात तो है राहुल गाँधी की तर्ज पर दलित के घर भोज के लिए जाना फिर बाबा साहिब की मूर्ति पर माथा टेकना यानि कई मायनो में अब बीजेपी समझ गई है की सिर्फ ब्राह्मणों की पार्टी बन कर नही चला जा सकता अगर अगले लोकसभा चुनाव में जीत चाहिए तो मुस्लिमों ओर अल्पसंख्यको की बात करनी ही होगी .

Saturday, February 20, 2010

बी टी बैंगन


बी टी बैंगन को लेकर आज कल चर्चा गरम है केंद्र सरकार हर हाल में इसके पक्ष में है वहीँ किसान इसका विरोध कर रहें है .लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है की आखिर बी टी बैंगन का उत्पादन किया ही क्यूँ जाये इसकी क्या जरुरत की जेनेटिकाली मोडिफ़ायफ़ूड को जहाँ विश्व स्तर पर नकार दिया है वहीं केंद्र इसके पक्ष में क्यों .न तो यह रोज मर्रा में इस्तेमाल होने वाला कोई उत्पाद और न ही इसके गुणों को लेकर इसकी कोई अधिक उपयोगिता.सरकार इसके लिए बी टी कपास का तर्क दे रही है पर इस सन्दर्भ में कोई कोई विशेष तर्क जनता क सामने रख नही पा रही है सरकार को चाहिए कि ऐसा करने से पहले वो जनता को इसके नफे नुकसान से रु रु कराए ताकि ऍम जनता भी इस पर अपने विचार रख सके.

हम लोग चिंता जयादा करते है श्रम कम


आज रविश कुमार ने एक उम्दा बात कही कि हम लोग चिंता जयादा करते है श्रम कम .दरअसल अगर हम अपने आसपास ही देखें तो हमे ऐसे बहुत से लोग दिख जायेंगे जो हर वक़्त ये सोच कर ही परेशान हो जाते है कि हमे कोई परेशानी क्यूँ नही है.ऐसे भी बहुत लोग है जो अपनी सोच में ही सोच सोच कर परेशान हो जाते है और उसी में ही उलझ जाते है.

Monday, January 25, 2010




२००७ की आईपीसीसी की रिपोर्ट मै कहा गया था की यदि ग्लेसिअर पिग्लने की रफ़्तार यूँ ही चलती रही तो २०३५ tak हिमालय के सभी ग्लेसिअर पिगल जँाऐंगे।लेकिन हाल ही में आईपीसीसी ने स्वीकार किया है कि यह रिपोर्ट कमजोर तथ्यों पर आधारित थी। जिसे आईपीसीसी के chairmen राजेंदर पचोरी ने भी स्वीकार है
दरअसल यह घटना स्पष्ट करती है कि किस तरह से विकसित देश कमजोर तथ्यों पर या मनगढ़ंत रिपोर्टों की आड़ में विकासशील देशों का दमन करते आए हैं।
वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ब्राउन क्लाउड यानी भूरा बादल संबंधी एक रिपोर्ट में भारत और चीन को जिम्मेदार ठहराया था कि दक्षिण एशिया का आकाश प्रदूषण के कारण एक भूरे रंग की धुंध से ढ़क गया है और 3 किलोमीटर मोटी इस प्रदूषित चादर के कारण धरती पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आई है।कृषि,मानसून और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव प्रभाव पड़ा है।उस समय आईआईटी बैंगलूरू के दो पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इन तर्कोें को ही निराधार बताया था।
इसी तरह एक अन्य शोध में बताया गया कि भारत ने 1990 में धान की खेती के कारण प्रतिवर्ष लगभग 38 मिलियन टन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली मीथेन गैंस का उत्सर्जन किया।जबकि कृषि वैज्ञानिक एपी मित्रा ने इसका प्रतिकार किया और बताया कि उत्सर्जन 38 नहीं 4 मिलियन टन प्रति वर्ष हुआ था।
यह उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि किस तरह से विकसित देश भविष्य में पर्यावरण के नाम पर अपने-अपने आथर््िाक हित साधेंगे और उनके यह हित आर्थिक प्रतिबंध,महंगी तकनीक,आयात पर टैक्स में बढ़ोतरी आदि के रूप में होंगे।ऐसे में भारत को ऐसा पर्यावरण तंत्र विकसित करना होगा।जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों पर सख्ती से कदम उठाना होगा।ताकि इस तरह से विकसित देशों की दादागिरी को रोका जा सके।

शरद का समर्पण



शरद का समर्पण
मंहगाई सुरसा की तरह मुँह बाहे खड़ी है मगर नेता है कि इसका ठीकरा एक दूसरे पर फौड़ने पर लगे हुए हैंैं। अब केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को ही लें अपने हालिया बयान में उन्होने कहा कि बढ़ती हुई महंगाई के लिए अकेला मैं ही जिम्मेदार नहीं हँू। इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जिम्मेदार हैं।देश में खाद्य पदार्थों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं उस पर से पवार दूध के दाम 40 से 50 रू प्रति किलो होने की बात करके दूध के दामों में अनिर्धारित वृद्धि करवा चुके हैं।
नेता मात्र बयान बाजी करके खाद्य पदार्थों के दामों को बढ़वा रहे हैं लेकिन इन सब के बीच नुकसान सिर्फ आम आदमी का ही हो रहा है।अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट के अनुसार देश में 77 प्रतिशत आबादी प्रतिदिन 20 रू कमाती है ऐसे में दूध और चीनी जैसी रोजमर्रा की अनिवार्य वस्तु का 40 से 50 रू प्रति किलो में उपलब्ध हो पाना आम आदमी के लिए गले की फाँस जैसा है।
यूपीए सरकार जब सत्ता में आई तो ‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ‘ इस नारे के साथ आई।लेकिन वर्तमान मंें आम जन की स्थिति को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है की कहाँ है कांग्रेस सरकार आम आदमी के साथ।
प्रस्तुति किरन कौर