Friday, November 19, 2010
अब मुझे प्यार से प्यार नही
सच है प्यार से इतना प्यार मत करो की तुमे एक दिन प्यार से प्यार ही न रहे
Friday, July 9, 2010
सिर्फ एक हसीं के liye
Monday, June 28, 2010
यहाँ हर साख पे उल्लू बेठा है
मुझे काटने को दोड़ता है यह ये लखनऊ शहर
जवाब नही जानती लेकिन ये सच है
यहाँ हर साख पे उल्लू बेठा है
Friday, May 21, 2010
आपका घर मकान बन जाये.
में अब समझ पातीहूँ की घर घर और मकान मकान क्यों है
सो दोस्तों आप में से जो भी खुशकिस्मत लोग अपने gharon में rehte hon
vo uski kimat ko samjhe और usme har pal को जियें एसा न हो की
जल्द ही आपका घर मकान बन जाये.
Saturday, May 15, 2010
hanuman जी की तीन varity है

भक्त आई एस आते।
Saturday, May 8, 2010
shant rehne me hi budhimani hai
jo har roj mujhe college jate waqt tokti thi or betuki baton ke liye lecture deti thi bujurg hai or is umar me unka sathiyana lajmi hai magar ek dam ghar se niklte waqt mujhe tokna mujhe pasand nhi ata tha aj phir wahi hua lekin aj me subh subh hi unki shikar ho gi or shuru ho gya unka guru gyan or kiraye ke liye chik chik.lekin ab vo khuch jada nhi boli kyunki me aj tak unki kisi bat jawab hi nhi deti ek maha deet ki tarah sirf unhe dekhti hun shayad mere is behave unhe khud hi shant ho jane ke liye vivash kar diya hai.
is puri ghatna se mujhe ek bat sikhne ko mili jab halat apke anukul na ho to shant rehne me hi budhimani hai.
Friday, May 7, 2010
केसे गुजरी होगी उसकी वो रात

Saturday, April 10, 2010
नक्सलवाद और गेट नंबर ३

Wednesday, April 7, 2010
लखनऊ में बहुत कुछ खास है
लखनऊ में बहुत कुछ खास है
यहाँ दिल्ली की तरह खीरे,मूली और गोभी 
किलो में नहीं बल्कि २ रुपये ५ रुपये की मिलती।
यहाँ ज्यादातर शाही खाना चाँदी के वर्क और ताम्बे के बर्तन में परोसा जाता है इसके पीछे वजह ये है की पुराने समय में जो अवाद के नवाब थे वो अपने दुश्मन के षडयन्त्रो से बचने के लिए खान इस तरह से परोसने का आदेश देते थे क्यूंकि अगर खाने में जहर होता था तो वेरक तुरंत नीला हो जाता था इसी तरह ताम्बे का बर्तन किनारों से काला रंग छोड़ देता था
यहाँ की खास स्वीट डिश अनारदाने का पुलाव है
Tuesday, April 6, 2010
तहजीब के इस शहर से तहजीब ही गायब है
कहते है नवाबों के शहर लखनऊ
में एक चीज जो खास है वो है यहाँ कि तहजीब
जिसके लिए इसे देश और दुनिया में जाना जाता है
इस शहर में आये मुझे ४ दिन हो गए और इन 4 दिनों का मेरा
अनुभव मुझे यह कहने पर मजबूर करता है कि
तहजीब के इस शहर से तहजीब ही गायब है
औरत के लिए इस शहर में कोई सम्मान नहीं
बस है तो सिर्फ गन्दी घूरती निगाह्यें
बस चले तो यह औरत को नोच खाएं
ऐसा नही कि यह सब दिल्ली जेसे बड़े शहरो में नही होता
मगर वहां कुछ खास लोग है जो ऐसी सोच के है
वर्ना वहां औरत के ब्रेन विद ब्यूटी को सम्मान है
लेकिन यहाँ सड़क चाप लोगों से लेकर बड़े बड़े दफ्तरों तक बस यही हाल है
सर से लेकर पांव तक घूरती nighayein या फिर सड़क चाप फब्तियां
aurat के सम्मान के लिहाज से गतिया शहर है लखनऊ
आज मैं भूखी हूँ

Monday, March 22, 2010
पुरुस्कार के बदले पिटाई

मशरूम की खेती करने के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार पाने वाली एक महिला जब ओड़िसा से दिल्ली आई तो वापस लोटने पर उसके पति ने उस पर दुश चरित्र होने का आरोप लगा कर मार पीट कर उसे घर से बाहर निकल दिया ।
Saturday, March 20, 2010
ज़िन्दगी लुटा दूँ
Friday, March 19, 2010
जब नींद आ रही हो
राजस्थान में आज भी सीट विधायकों के लिए आरक्षित होती है।

हाल ही में राजस्थान जाने का मोका मिला काफी चीजें देखी।
लेकिन एक चीज ने मुझे बड़ा आकर्षित किया ,कि राजस्थान
की बसों में आज भी पहली और दूसरी सीट विधायकों के लिए
आरक्षित होती है। भले ही विधायक कभी उस बस में बेठे नही
लेकिन फिर भी सीटें आरक्षित है । दरअसल हमारे देश की
यही विडंबना है की जिसे आरक्षण की जरूरत होती है उसे
उसका लाभ नही मिलता और असली मलाई कोई और चाट जाता है.
Thursday, March 18, 2010
ख़ुशी में दोहरा इजाफा हुआ

महंगाई बढ रही है

इस दुनिया मै सब से मुश्किल क्या है
भारत में दुनिया के एक तिहाई भूखे रहते है

ग्लोबल हंगेर इंडेक्स के अनुसार
भारत में दुनिया के एक तिहाई
भूखे रहते है जिनकी संख्या ३२
करोड़ से अधिक है।एसे में सरकार
गेंहू का निर्यात करने के बारे में सोच
रही है। यह सरासर बेवकूफी नही है
तो और क्या है। साफ है इस तरह
के निर्यात का फायदा केवल बिचोलियों को
होगा और किसी को नही । बिचोलिये
निर्यात के नाम पर धड़ल्ले से स्टोक
करेंगे और एक बार फिर खाद्य पदार्थों के
दाम बढेंगे.
Wednesday, March 17, 2010
खुद पर से ही विश्वास क्यूँ उठने लगता है।
नर हो न निराश करो मन को इसके पीछे भी एक बात है मेरे ठीक साथ वाली कुर्सी पर मेरा एक दोस्त बेहद हताश है
नोबेल पुरूस्कार
Friday, March 5, 2010
एक स्कूल का शर्मनाक रवैया

Friday, February 26, 2010
क्या आप जवाब दे पाएंगे

Monday, February 22, 2010
एक धन्यवाद
इस बार वेश्नो देवी जाने का मोका मिला देख कर बहुत ख़ुशी हुई। वो इसलिए क्यूंकि पहली बार किसी धार्मिक जगह पर इतनी भीड़ होते हुए भी साफ सफाई की उचित व्यवस्था देखने को मिली, यात्रियों के रहने से लेकर उनके खाने पीने अदि सभी का उचित प्रबन्ध। जाने से कुछ दिन पहले ही दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में एंकर लीड में खबर पड़ी थी की सिर्फ दो ढाबों पर चल रही है माँ वेश्नो देवी की चढाई। पढ़ी हुई बात और आँखों देखी बात में जमीन असमान का फर्क था तब लगा की वाकई मीडिया अपनी स्टोरी या खबर क लिए किस तरह कुछ भी दिखा या लिख सकता है। बेहरहाल श्रअइन बोर्ड का इतनी बेहतरीन सुविधा क लिए धन्यवाद ।
बदले बदले से हैं जनाब के तेवर

Saturday, February 20, 2010
बी टी बैंगन

हम लोग चिंता जयादा करते है श्रम कम

Monday, January 25, 2010


दरअसल यह घटना स्पष्ट करती है कि किस तरह से विकसित देश कमजोर तथ्यों पर या मनगढ़ंत रिपोर्टों की आड़ में विकासशील देशों का दमन करते आए हैं।
वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ब्राउन क्लाउड यानी भूरा बादल संबंधी एक रिपोर्ट में भारत और चीन को जिम्मेदार ठहराया था कि दक्षिण एशिया का आकाश प्रदूषण के कारण एक भूरे रंग की धुंध से ढ़क गया है और 3 किलोमीटर मोटी इस प्रदूषित चादर के कारण धरती पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आई है।कृषि,मानसून और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव प्रभाव पड़ा है।उस समय आईआईटी बैंगलूरू के दो पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इन तर्कोें को ही निराधार बताया था।
इसी तरह एक अन्य शोध में बताया गया कि भारत ने 1990 में धान की खेती के कारण प्रतिवर्ष लगभग 38 मिलियन टन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली मीथेन गैंस का उत्सर्जन किया।जबकि कृषि वैज्ञानिक एपी मित्रा ने इसका प्रतिकार किया और बताया कि उत्सर्जन 38 नहीं 4 मिलियन टन प्रति वर्ष हुआ था।
यह उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि किस तरह से विकसित देश भविष्य में पर्यावरण के नाम पर अपने-अपने आथर््िाक हित साधेंगे और उनके यह हित आर्थिक प्रतिबंध,महंगी तकनीक,आयात पर टैक्स में बढ़ोतरी आदि के रूप में होंगे।ऐसे में भारत को ऐसा पर्यावरण तंत्र विकसित करना होगा।जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों पर सख्ती से कदम उठाना होगा।ताकि इस तरह से विकसित देशों की दादागिरी को रोका जा सके।
शरद का समर्पण

शरद का समर्पण
मंहगाई सुरसा की तरह मुँह बाहे खड़ी है मगर नेता है कि इसका ठीकरा एक दूसरे पर फौड़ने पर लगे हुए हैंैं। अब केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को ही लें अपने हालिया बयान में उन्होने कहा कि बढ़ती हुई महंगाई के लिए अकेला मैं ही जिम्मेदार नहीं हँू। इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जिम्मेदार हैं।देश में खाद्य पदार्थों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं उस पर से पवार दूध के दाम 40 से 50 रू प्रति किलो होने की बात करके दूध के दामों में अनिर्धारित वृद्धि करवा चुके हैं।
नेता मात्र बयान बाजी करके खाद्य पदार्थों के दामों को बढ़वा रहे हैं लेकिन इन सब के बीच नुकसान सिर्फ आम आदमी का ही हो रहा है।अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट के अनुसार देश में 77 प्रतिशत आबादी प्रतिदिन 20 रू कमाती है ऐसे में दूध और चीनी जैसी रोजमर्रा की अनिवार्य वस्तु का 40 से 50 रू प्रति किलो में उपलब्ध हो पाना आम आदमी के लिए गले की फाँस जैसा है।
यूपीए सरकार जब सत्ता में आई तो ‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ‘ इस नारे के साथ आई।लेकिन वर्तमान मंें आम जन की स्थिति को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है की कहाँ है कांग्रेस सरकार आम आदमी के साथ।
प्रस्तुति किरन कौर





