Friday, May 21, 2010

आपका घर मकान बन जाये.

कई दिनों के बाद अब सुकून मिल पाया
में अब समझ पातीहूँ की घर घर और मकान मकान क्यों है
सो दोस्तों आप में से जो भी खुशकिस्मत लोग अपने gharon में rehte hon
vo uski kimat ko samjhe और usme har pal को जियें एसा न हो की
जल्द ही आपका घर मकान बन जाये.

Saturday, May 15, 2010

hanuman जी की तीन varity है


lucknow गजब शहर है यहाँ हर कुछ खास है अब हनुमान जी को ही लो

यहाँ लोगों के लिए हनुमान तीन तरह के है

एक आम लोगों के हनुमान

दुसरे आई एस हनुमान

तीसरे वकील हनुमान

आई एस हनुमान जी के मंदिर की यह खासियत है की यहाँ जयादातर
भक्त आई एस आते।

वकील हनुमान जी के मंदिर में वकील भक्त ज्यादा आते है

तो कुल मिला कर यहाँ हनुमान
जी की तीन varity है अब आप जिस केटेगरी

में हो आप अपने आराध्य को उस रूप में पूजे.

Saturday, May 8, 2010

shant rehne me hi budhimani hai

pichle do din se me bahut gusse me thio vajah thi meri makan malkin
jo har roj mujhe college jate waqt tokti thi or betuki baton ke liye lecture deti thi bujurg hai or is umar me unka sathiyana lajmi hai magar ek dam ghar se niklte waqt mujhe tokna mujhe pasand nhi ata tha aj phir wahi hua lekin aj me subh subh hi unki shikar ho gi or shuru ho gya unka guru gyan or kiraye ke liye chik chik.lekin ab vo khuch jada nhi boli kyunki me aj tak unki kisi bat jawab hi nhi deti ek maha deet ki tarah sirf unhe dekhti hun shayad mere is behave unhe khud hi shant ho jane ke liye vivash kar diya hai.
is puri ghatna se mujhe ek bat sikhne ko mili jab halat apke anukul na ho to shant rehne me hi budhimani hai.

Friday, May 7, 2010

केसे गुजरी होगी उसकी वो रात


हमारा देश भी बड़ा अजीब है कभी यहाँ किसान पानी की एक बूँद के लिए तरसता है तो कभी झमा झम पानी उसकी फसल को बर्बाद कर डालता है.कल रात लखनऊ में पहली बारिस देखी सुबह बाराबंकी की ओर जाते हुए

बारिस से नहाये लहलाहते खेत देखे उन्हें देख देख कर मै बहुत खुश हो रही थी और खुद को किसी जन्नत में होने का एहसास करा रही थी चारो तरफ दूर दूर तक फेले सपाट खेत जिन पर कहीं मिर्च के पोधे थे तो कहीं आम से लादे विशाल पेड़ मेरे लिए यह अनूठा था क्यूंकि में देल्ही की हूँ और वहां की बड़ी बड़ी इमारतों के बीच एसा सुखद एहसास कहाँ ये नज़ारे मन मो रहे थे लेकिन जसे ही मेरी गाढ़ी थोड़ी आगे बड़ी मेरा दिल दख रह गया गैस फूस से बनी झोपड़ी मै किसान ओर उसका परिवार रो रहा था क्यूंकि रत की बारिस मै उसकी सारी गेंहू भीग गयी थी जो शायद उसकी साल भर की रोजी रोटी थी.इसे कई परिवार थे । तब से मेरे दिल मै एक ही सवाल रह रह कर अ रहा है की केसे गुजारी होगी उस किसान ने वो रात