स्वाभिमान से बढकर मेरे लिए कुछ नही अज एक मुश्किल दिन था एक तरफ मेरा स्वाभिमान था तो दूसरी तरफ मेरा प्यार। पर अज अपने फेसले से खुश हूँ की प्यार और स्वाभिमान के बिच प्यार को चुना। प्यार को चुनती तो स्वाभिमान खो देती और उसी में समाप्त हो जाता मेरा अस्तित्व लेकिन अज खुश हूँ स्वाभिमान को चुना।
सच है प्यार से इतना प्यार मत करो की तुमे एक दिन प्यार से प्यार ही न रहे