
एक अनार और १०० बीमार! बचपन में यह कहावत कई बार टीचर ने रट्वाई। तब न मतलब समझ आया और न इसकी गम्भीरता, बस रट लिया। लेकिन जब ग्रेजुएट हुई तो कई बार इंटरव्यू में इस सच्चाई का सामना किया। मगर आज बिग एफ एम के इंटरव्यू में इस कहावत का भयावह चेहरा देखने को मिला। सुबह के १० बजे थे, रोज की तरह हम सभी कॉलेज पहुंचे लेकिन आज वो मस्ती, वो शरारत किसी के भी चेहरे पर नजर नही आई। हस्ते हुएसब एक दूसरे से बात तो कर रहे थे मगर मन में सभी के एक तनाव था, एक dar था। बात शुरू हुई ....... कि वो आये नही। फिर कुछ समय के बाद अफवाह उडी कि उन्हें चाहिए ४ और कैन्डिडेट है १०४ इस बात ने सब के तनाव को और बढ़ा दिया। इतने में पता चला कि किसी सदी में पास आउट आर जे कोर्स के स्टुडेंट भी भेठने वाले है बस क्या था हर किसी ने मन ही मन खुद को टटोला और परेशान हो इधर उधर जाने लगे। थोड़ी देर बाद ही आदेशानुसार मिनी ऑडी में बेठने को कहा गया। बस हर कोई चल दिया उस और अपनी किस्मत अजमाने। १० बजे से बेठे बेठे १ बज गया मगर वो नही आये। अब तनाव बढ़ रहा था जो हम सभी पर हावी होता जा रहा था और हर किसी के जेहन में एक ही सवाल रह रह कर कोंध रहा था कि मेरा क्या होगा। बेहरहाल वो आये और पता चला कि वो रिटन नही इंटरव्यू लेंगे आधे से जादा लोग वहीँ धराशाही हो गये १०४ कि गिनती सिमट कर ५० भी नही रही पर उसके बाद निराश लोगों के जो चेहरे पर देखने को मिली बो भयावह थी उन आँखों में निराशा साफ थी और उस से भी बढ़ कर भविष्य कि चिंता.उन आँखों में वो सपने बार बार घूम रहे थे कि घर किस मुंह से जाउंगी /जाऊंगा.बस मेरा आप सब से एक सवाल है कि हर कोई हम से उमीद करता है कि हम जन सेवा करें पर कहाँ से होगी ये जन सेवा जब कोई रास्ता ही न होगा.



