Friday, February 26, 2010

क्या आप जवाब दे पाएंगे


एक अनार और १०० बीमार! बचपन में यह कहावत कई बार टीचर ने रट्वाई। तब न मतलब समझ आया और न इसकी गम्भीरता, बस रट लिया। लेकिन जब ग्रेजुएट हुई तो कई बार इंटरव्यू में इस सच्चाई का सामना किया। मगर आज बिग एफ एम के इंटरव्यू में इस कहावत का भयावह चेहरा देखने को मिला। सुबह के १० बजे थे, रोज की तरह हम सभी कॉलेज पहुंचे लेकिन आज वो मस्ती, वो शरारत किसी के भी चेहरे पर नजर नही आई। हस्ते हुएसब एक दूसरे से बात तो कर रहे थे मगर मन में सभी के एक तनाव था, एक dar था। बात शुरू हुई ....... कि वो आये नही। फिर कुछ समय के बाद अफवाह उडी कि उन्हें चाहिए ४ और कैन्डिडेट है १०४ इस बात ने सब के तनाव को और बढ़ा दिया। इतने में पता चला कि किसी सदी में पास आउट आर जे कोर्स के स्टुडेंट भी भेठने वाले है बस क्या था हर किसी ने मन ही मन खुद को टटोला और परेशान हो इधर उधर जाने लगे। थोड़ी देर बाद ही आदेशानुसार मिनी ऑडी में बेठने को कहा गया। बस हर कोई चल दिया उस और अपनी किस्मत अजमाने। १० बजे से बेठे बेठे १ बज गया मगर वो नही आये। अब तनाव बढ़ रहा था जो हम सभी पर हावी होता जा रहा था और हर किसी के जेहन में एक ही सवाल रह रह कर कोंध रहा था कि मेरा क्या होगा। बेहरहाल वो आये और पता चला कि वो रिटन नही इंटरव्यू लेंगे आधे से जादा लोग वहीँ धराशाही हो गये १०४ कि गिनती सिमट कर ५० भी नही रही पर उसके बाद निराश लोगों के जो चेहरे पर देखने को मिली बो भयावह थी उन आँखों में निराशा साफ थी और उस से भी बढ़ कर भविष्य कि चिंता.उन आँखों में वो सपने बार बार घूम रहे थे कि घर किस मुंह से जाउंगी /जाऊंगा.बस मेरा आप सब से एक सवाल है कि हर कोई हम से उमीद करता है कि हम जन सेवा करें पर कहाँ से होगी ये जन सेवा जब कोई रास्ता ही न होगा.

Monday, February 22, 2010

एक धन्यवाद

इस बार वेश्नो देवी जाने का मोका मिला देख कर बहुत ख़ुशी हुई। वो इसलिए क्यूंकि पहली बार किसी धार्मिक जगह पर इतनी भीड़ होते हुए भी साफ सफाई की उचित व्यवस्था देखने को मिली, यात्रियों के रहने से लेकर उनके खाने पीने अदि सभी का उचित प्रबन्ध। जाने से कुछ दिन पहले ही दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में एंकर लीड में खबर पड़ी थी की सिर्फ दो ढाबों पर चल रही है माँ वेश्नो देवी की चढाई। पढ़ी हुई बात और आँखों देखी बात में जमीन असमान का फर्क था तब लगा की वाकई मीडिया अपनी स्टोरी या खबर क लिए किस तरह कुछ भी दिखा या लिख सकता है। बेहरहाल श्रअइन बोर्ड का इतनी बेहतरीन सुविधा क लिए धन्यवाद ।

बदले बदले से हैं जनाब के तेवर


बीजेपी के बारे में कहावत प्रचलित थी की ये तो ब्राह्मणों की पार्टी है.लेकिन कुछ दिनों पहले बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने जिस तरह से मुस्लिमो और अल्पसंख्यंको की बात कही उससे लगा की अब बयार कुछ बदलाव की ओर है.भले ही उसके जरिये उन्होंने अपने राम मंदिर निर्माण के अलाप को भी गा दिया पर एक बार फिर से मुस्लिमो की बात तो कही.२००४ में जब बिहार में एक रैली में अटल बिहारी वाजपयी ने मुस्लिमो की बात कही थी तो अंदरूनी रूप से पार्टी उन से नाराज हुई मगर आजकल पार्टी अध्यक्ष का जो बर्ताव दिखाई देता है उसमे कुछ बात तो है राहुल गाँधी की तर्ज पर दलित के घर भोज के लिए जाना फिर बाबा साहिब की मूर्ति पर माथा टेकना यानि कई मायनो में अब बीजेपी समझ गई है की सिर्फ ब्राह्मणों की पार्टी बन कर नही चला जा सकता अगर अगले लोकसभा चुनाव में जीत चाहिए तो मुस्लिमों ओर अल्पसंख्यको की बात करनी ही होगी .

Saturday, February 20, 2010

बी टी बैंगन


बी टी बैंगन को लेकर आज कल चर्चा गरम है केंद्र सरकार हर हाल में इसके पक्ष में है वहीँ किसान इसका विरोध कर रहें है .लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है की आखिर बी टी बैंगन का उत्पादन किया ही क्यूँ जाये इसकी क्या जरुरत की जेनेटिकाली मोडिफ़ायफ़ूड को जहाँ विश्व स्तर पर नकार दिया है वहीं केंद्र इसके पक्ष में क्यों .न तो यह रोज मर्रा में इस्तेमाल होने वाला कोई उत्पाद और न ही इसके गुणों को लेकर इसकी कोई अधिक उपयोगिता.सरकार इसके लिए बी टी कपास का तर्क दे रही है पर इस सन्दर्भ में कोई कोई विशेष तर्क जनता क सामने रख नही पा रही है सरकार को चाहिए कि ऐसा करने से पहले वो जनता को इसके नफे नुकसान से रु रु कराए ताकि ऍम जनता भी इस पर अपने विचार रख सके.

हम लोग चिंता जयादा करते है श्रम कम


आज रविश कुमार ने एक उम्दा बात कही कि हम लोग चिंता जयादा करते है श्रम कम .दरअसल अगर हम अपने आसपास ही देखें तो हमे ऐसे बहुत से लोग दिख जायेंगे जो हर वक़्त ये सोच कर ही परेशान हो जाते है कि हमे कोई परेशानी क्यूँ नही है.ऐसे भी बहुत लोग है जो अपनी सोच में ही सोच सोच कर परेशान हो जाते है और उसी में ही उलझ जाते है.