Friday, July 9, 2010

सिर्फ एक हसीं के liye


मुझे बीते तिन महीनो में वो दिन याद नहीं आता जब में दिल खोल के हसीं हूँ

क्या आपको याकड है अगर हाँ तुझे मुझे बताएं ताकि उस बहाने में हस सहूँ।

क्यूंकि लखनऊ में लोग हसना भूल गये है