
Saturday, April 10, 2010
नक्सलवाद और गेट नंबर ३

Wednesday, April 7, 2010
लखनऊ में बहुत कुछ खास है
लखनऊ में बहुत कुछ खास है
यहाँ दिल्ली की तरह खीरे,मूली और गोभी 
किलो में नहीं बल्कि २ रुपये ५ रुपये की मिलती।
यहाँ ज्यादातर शाही खाना चाँदी के वर्क और ताम्बे के बर्तन में परोसा जाता है इसके पीछे वजह ये है की पुराने समय में जो अवाद के नवाब थे वो अपने दुश्मन के षडयन्त्रो से बचने के लिए खान इस तरह से परोसने का आदेश देते थे क्यूंकि अगर खाने में जहर होता था तो वेरक तुरंत नीला हो जाता था इसी तरह ताम्बे का बर्तन किनारों से काला रंग छोड़ देता था
यहाँ की खास स्वीट डिश अनारदाने का पुलाव है
Tuesday, April 6, 2010
तहजीब के इस शहर से तहजीब ही गायब है
कहते है नवाबों के शहर लखनऊ
में एक चीज जो खास है वो है यहाँ कि तहजीब
जिसके लिए इसे देश और दुनिया में जाना जाता है
इस शहर में आये मुझे ४ दिन हो गए और इन 4 दिनों का मेरा
अनुभव मुझे यह कहने पर मजबूर करता है कि
तहजीब के इस शहर से तहजीब ही गायब है
औरत के लिए इस शहर में कोई सम्मान नहीं
बस है तो सिर्फ गन्दी घूरती निगाह्यें
बस चले तो यह औरत को नोच खाएं
ऐसा नही कि यह सब दिल्ली जेसे बड़े शहरो में नही होता
मगर वहां कुछ खास लोग है जो ऐसी सोच के है
वर्ना वहां औरत के ब्रेन विद ब्यूटी को सम्मान है
लेकिन यहाँ सड़क चाप लोगों से लेकर बड़े बड़े दफ्तरों तक बस यही हाल है
सर से लेकर पांव तक घूरती nighayein या फिर सड़क चाप फब्तियां
aurat के सम्मान के लिहाज से गतिया शहर है लखनऊ
आज मैं भूखी हूँ
