
बीजेपी के बारे में कहावत प्रचलित थी की ये तो ब्राह्मणों की पार्टी है.लेकिन कुछ दिनों पहले बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने जिस तरह से मुस्लिमो और अल्पसंख्यंको की बात कही उससे लगा की अब बयार कुछ बदलाव की ओर है.भले ही उसके जरिये उन्होंने अपने राम मंदिर निर्माण के अलाप को भी गा दिया पर एक बार फिर से मुस्लिमो की बात तो कही.२००४ में जब बिहार में एक रैली में अटल बिहारी वाजपयी ने मुस्लिमो की बात कही थी तो अंदरूनी रूप से पार्टी उन से नाराज हुई मगर आजकल पार्टी अध्यक्ष का जो बर्ताव दिखाई देता है उसमे कुछ बात तो है राहुल गाँधी की तर्ज पर दलित के घर भोज के लिए जाना फिर बाबा साहिब की मूर्ति पर माथा टेकना यानि कई मायनो में अब बीजेपी समझ गई है की सिर्फ ब्राह्मणों की पार्टी बन कर नही चला जा सकता अगर अगले लोकसभा चुनाव में जीत चाहिए तो मुस्लिमों ओर अल्पसंख्यको की बात करनी ही होगी .
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