
मुझे करीब से जानने वाले लोग जानते है
कि मैं खाने की बहुत बड़ी शोकिन हूँ
मेरा मानना है कि इस दुनिया में do तरह के लोग रहते है
एक वो जो जीने के लिए खाते है
और एक वो जो खाने के लिए jite है
बेहरहाल अपनी गिनती दूसरे तरह के लोगों में होती है
मगर आज का दिन मुझे जीवन भर याद रहेगा
शाम के ६ बजने को आयें है आज मैं भूखी हूँ
ऐसा नही है कि मेरे पास पइसे नही मगर
ऑफिस से लेकर दूर दूर तक khin कैंटीन नहीं
लेकिन दिल्ली से अच्हा जलजीरा यहाँ जरुर मिलता है
आस है कि अच्हा खाना मिल जाये वर्ना bhagwaan जाने मेरा क्या होगा
अंत में तो यही सोच कर संतोष कर लूँ हारे को हरी नाम .
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