
हमारा देश भी बड़ा अजीब है कभी यहाँ किसान पानी की एक बूँद के लिए तरसता है तो कभी झमा झम पानी उसकी फसल को बर्बाद कर डालता है.कल रात लखनऊ में पहली बारिस देखी सुबह बाराबंकी की ओर जाते हुए
बारिस से नहाये लहलाहते खेत देखे उन्हें देख देख कर मै बहुत खुश हो रही थी और खुद को किसी जन्नत में होने का एहसास करा रही थी चारो तरफ दूर दूर तक फेले सपाट खेत जिन पर कहीं मिर्च के पोधे थे तो कहीं आम से लादे विशाल पेड़ मेरे लिए यह अनूठा था क्यूंकि में देल्ही की हूँ और वहां की बड़ी बड़ी इमारतों के बीच एसा सुखद एहसास कहाँ ये नज़ारे मन मो रहे थे लेकिन जसे ही मेरी गाढ़ी थोड़ी आगे बड़ी मेरा दिल दख रह गया गैस फूस से बनी झोपड़ी मै किसान ओर उसका परिवार रो रहा था क्यूंकि रत की बारिस मै उसकी सारी गेंहू भीग गयी थी जो शायद उसकी साल भर की रोजी रोटी थी.इसे कई परिवार थे । तब से मेरे दिल मै एक ही सवाल रह रह कर अ रहा है की केसे गुजारी होगी उस किसान ने वो रात
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